राम के नाम पर चंदे की लुट  की जवाबदेही  से भाजपा सीनाजोरी कर बच नही सकती:कांग्रेस

रांची,  :  झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमिटी के प्रदेश प्रवक्ता विजय शंकर नायक ने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू के उस बयान को दुर्भाग्यपूर्ण और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रतिकूल बताया, जिसमें उन्होंने कहा कि कांग्रेस को राम मंदिर पर बोलने का नैतिक अधिकार नहीं है। विजय शंकर नायक ने कहा कि नैतिकता का प्रमाणपत्र बांटने से पहले भाजपा को देश की जनता के उन सवालों का जवाब देना चाहिए, जो राम मंदिर निर्माण से जुड़े चंदे, वित्तीय पारदर्शिता और राम के नाम पर चंदे की लुट  की जवाबदेही  से भाजपा सीनाजोरी कर बच नही सकती । लोकतंत्र में प्रश्न पूछना अपराध नहीं, बल्कि जनता का संवैधानिक अधिकार है। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम भारत की सांस्कृतिक चेतना, मर्यादा और न्याय के प्रतीक हैं। किसी भी राजनीतिक दल को यह अधिकार नहीं है कि वह राम के नाम पर प्रश्न पूछने वालों की देशभक्ति या आस्था पर सवाल उठाए। राम सबके हैं, इसलिए राम के नाम पर प्राप्त जनसहयोग की चंदा की राशी के प्रति  भी   जवाबदेह होना चाहिए।विजय शंकर नायक ने आगे  कहा कि सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी के अनुसार श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को देश-विदेश के श्रद्धालुओं से मंदिर निर्माण के लिए हजारों करोड़ रुपये का चंदा / दान प्राप्त हुआ है। जब इतनी बड़ी मात्रा में जनता का योगदान जुड़ा हो, तब वित्तीय पारदर्शिता और नियमित सार्वजनिक लेखा-जोखा लोकतांत्रिक अपेक्षा है, राजनीतिक हमला नहीं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2021 में अयोध्या में कुछ भूमि खरीद-बिक्री को लेकर सार्वजनिक विवाद सामने आए थे। उन मामलों में विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों ने जांच की मांग की थी, जबकि संबंधित ट्रस्ट ने आरोपों का खंडन किया था। ऐसे मामलों में तथ्यों के आधार पर स्पष्टीकरण देना ही जनता का विश्वास मजबूत करता है।विजय शंकर नायक ने भाजपा से मांग की कि यदि वह वास्तव में पारदर्शिता और नैतिकता में विश्वास करती है, तो राम मंदिर निर्माण से जुड़े वित्तीय विवरण, प्रमुख अनुबंधों, व्यय और ऑडिट संबंधी जानकारी को नियमित रूप से सार्वजनिक करने की व्यवस्था का समर्थन करे। उन्होंने कहा कि “आस्था पर किसी का एकाधिकार नहीं हो सकता। श्रीराम सत्य, मर्यादा और उत्तरदायित्व के प्रतीक हैं। इसलिए श्रीराम के नाम पर प्राप्त जनसहयोग के संबंध में उठने वाले वैध प्रश्नों का उत्तर तथ्यों से दिया जाना चाहिए, राजनीतिक आरोपों से नहीं। भाजपा को विपक्ष पर हमला करने के बजाय पारदर्शिता के माध्यम से जनता का विश्वास और मजबूत करना चाहिए। 

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