पटना, :विश्व बाल श्रम निषेध दिवस की पूर्व संध्या के अवसर पर बिहार विधान सभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने कहा कि बाल श्रम समाज और मानवता पर एक गंभीर कलंक है। प्रत्येक बच्चे को सुरक्षित बचपन, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, उचित पोषण तथा सम्मानजनक जीवन का अधिकार प्राप्त है। बच्चों से मजदूरी कराना न केवल उनके मौलिक अधिकारों का हनन है, बल्कि राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य को भी प्रभावित करता है।डॉ. प्रेम कुमार ने कहा कि भारत सरकार एवं बिहार सरकार बाल श्रम उन्मूलन के लिए अनेक कल्याणकारी योजनाएं संचालित कर रही हैं। शिक्षा का अधिकार अधिनियम, समग्र शिक्षा अभियान, मध्याह्न भोजन योजना तथा विभिन्न सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रमों के माध्यम से बच्चों को विद्यालयों से जोड़ने और उन्हें श्रम से मुक्त कराने के निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।उन्होंने कहा कि किसी भी विकसित राष्ट्र की पहचान उसके बच्चों की स्थिति से होती है। यदि बच्चे शिक्षित, स्वस्थ और सुरक्षित होंगे तो देश का भविष्य भी सशक्त होगा। समाज के प्रत्येक नागरिक, अभिभावक, शिक्षक, उद्योगपति तथा सामाजिक संगठनों का दायित्व है कि वे बाल श्रम के विरुद्ध जागरूकता फैलाएं और किसी भी बच्चे को मजदूरी करने के लिए विवश न होने दें।उन्होंने सभी नागरिकों से आह्वान किया कि वे बाल श्रमिकों की पहचान कर उन्हें शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने में प्रशासन का सहयोग करें। उन्होंने कहा कि बच्चों के हाथों में औजार नहीं, बल्कि पुस्तकें और कलम होनी चाहिए। यही विकसित, समृद्ध और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण का आधार है।अंत में डॉ. प्रेम कुमार ने बाल श्रम उन्मूलन के लिए कार्य कर रहे सभी सरकारी एवं गैर-सरकारी संगठनों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि सामूहिक सहभागिता और जन-जागरूकता के माध्यम से ही बाल श्रम मुक्त समाज का निर्माण संभव है।