स्कॉरशिप देने में घूस मांगने वाले प्राचार्य को तीन साल की सजा, घूस लेते जेई समेत दो गिरफ्तार

पटना :निगरानी ब्यूरो के ट्रैप के एक पुराने मामले में न्यायालय ने गुरुवार को घूस लेने वाले प्रिंसिपल को तीन वर्ष की सजा सुनाई है। इस केस में निगरानी ब्यूरो के अधिवक्ता श्री विजय भानू सिंह ने बताया कि 2012 में पटना जिले के पालीगंज थाना क्षेत्र की रहने वाली गौरवी रंजन नाम की छात्रा ने पालीगंज के रघुनाथपुर स्थित दामोदर उच्च विद्यालय के तत्कालीन प्रभारी प्राचार्य उपेंद्र शर्मा पर छात्रवृत्ति की राशि का चेक देने के ऐवज में 2 हजार रुपये घूस की मांग की थी। निगरानी ब्यूरो के स्तर से इस मामले की जांच की गई, तो मामला सही पाया गया। इसके बाद तत्कालीन प्राचार्य उपेंद्र शर्मा को दो हजार रुपये घूस लेते हुए रंगे हाथ पटना में बोरिंग रोड में पेट्रोल पंप के पास से गिरफ्तार किया गया था। उसके पास से 10 हजार रुपये का स्कॉलरशिप से संबंधित चेक बरामद हुआ था।
इस केस की सुनवाई करते हुए पटना स्थित विशेष निगरानी न्यायालय के माननीय न्यायाधीश श्री अतुल कुमार सिंह ने इस अपराध को बेहद गंभीर बताया। कहा कि मामला सिर्फ दो हजार रुपये घूस लेने तक ही सीमित नहीं है। बच्चों को स्कॉरशिप देने के नाम पर घूस लेना गंभीर अपराध है। छात्रवृत्ति के लिए घूस मांगना बेहद शर्मनाक है।
इस मामले में निगरानी ब्यूरो के महानिदेशक जितेंद्र सिंह गंगवार ने बताया कि इस वर्ष में अब तक भ्रष्टाचार से जुड़े 13 मामलों में कोर्ट से सजा सुनाई गई है। यह 14वां मामला है। परंतु कम मामले ही ऐसे हैं, जिसमें 3 वर्ष या इससे अधिक की सजा सुनाई गई है। ट्रैप के इस मामले को गंभीर प्रवृत्ति का मानते हुए न्यायालय ने तीन वर्ष की सजा आरोपी को सुनाई है। भ्रष्टाचारियों को दबोचने के साथ ही उन्हें कोर्ट से सजा दिलाने की कार्रवाई निरंतर जारी रहेगी।
पूर्णिया के जेई और टेक्निशियन 10 हजार घूस लेते गिरफ्तार
विशेष निगरानी इकाई (एसवीयू) ने गुरुवार को पूर्णिया में के. नगर के बिजली विभाग के जेई भरत मलिक और टेक्निशियन ग्रेड-3 (लाइन मैन) पंकज कुमार मेहता और आशुतोष कुमार पांडेय को 10 हजार रुपये घूस लेते रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। इस मामले में एडीजी (एसवीयू) सुधांशु कुमार ने बताया कि इस मामले की शिकायत जिले के मरंगा थाना के बखरी कोल निवासी राजेश कुमार साह ने की थी। परिवादी ने इन बिजली कर्मियों पर विद्युत कनेक्शन देने के नाम पर 25 हजार रुपये घूस मांगने की शिकायत की थी। पहले 10 हजार रुपये देने थे, शेष राशि कनेक्शन लगने बाद देना तय हुआ था। इस मामले की जांच कराने पर यह सही पाया गया। इसके बाद ट्रैप की यह कार्रवाई की गई है। इनकी गिरफ्तारी के बाद भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की सुसंगत धाराओं के तहत कार्रवाई की गई है।

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