पटना : बिहार राज्य मत्स्यजीवी सहकारी संघ (कॉफ्फेड), पटना की 76वीं वार्षिक आम सभा विद्यापति भवन के सभागार, पटना में सफलतापूर्वक सम्पन्न हुई। कार्यक्रम में कॉफ्फेड से संबद्ध मत्स्यजीवी सहकारी समितियों के प्रतिनिधियों, मंत्री, अध्यक्ष, निदेशक मंडल के सदस्यों, पदाधिकारियों, कर्मचारियों एवं आमंत्रित अतिथियों ने भाग लिया।कार्यक्रम का उद्घाटन हरि सहनी, सदस्य, बिहार विधान परिषद एवं पूर्व मंत्री, बिहार सरकार ने किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रयाग सहनी, अध्यक्ष, कॉफ्फेड ने की। मुख्य वक्ता के रूप में ऋषिकेश कश्यप, प्रबंध निदेशक, कॉफ्फेड ने सभा को संबोधित किया, जबकि मंच संचालन सिमरन ने किया। दिन की शुरुआत कॉफ्फेड की 299वीं निदेशक मंडल की बैठक से हुई। इसके पश्चात 76वीं वार्षिक आम सभा आयोजित हुई, जिसमें जलाशयों की खुली डाक रोकने, परंपरागत मछुआरों की सूची जारी करने, मत्स्य विभाग की मछुआ विरोधी नीतियों तथा मछुआ समितियों से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई।कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए हरि सहनी ने कहा कि मछुआ सहकारी समितियां मछुआरा समाज की सामूहिक शक्ति का आधार हैं। मजबूत सहकारिता के माध्यम से ही मछुआरों को बेहतर आजीविका, संस्थागत सहायता और बाजार से प्रभावी रूप से जोड़ा जा सकता है।श्री सहनी ने कहा कि मछुआरा समाज का जीवन तालाबों, जलाशयों, नदियों और अन्य जल संसाधनों से प्रत्यक्ष रूप से जुड़ा हुआ है। इसलिए जल संसाधनों और मत्स्य पालन से संबंधित नीतियों के क्रियान्वयन में वास्तविक मछुआरों एवं उनकी सहकारी समितियों की समस्याओं और हितों को मैनें गंभीरता से सुना एवं उसपर पत्राचार किया।द मुख्य वक्ता के रूप में ’’कॉफ्फेड के प्रबंध निदेशक ऋषिकेश कश्यप’’ ने 76वीं आम सभा में कहा कि मत्स्य विभाग राज्य के जलाशयो की खुली से बंदोबस्ती पर तत्काल रोक लगाए। अभी हाल ही में नवादा जिला के बडे़ जलाशयों को खुली डाक से बंदोबस्त कर दिया गया। खुली डाक से जलाशयों को बंदोबस्त करने से मछुआरों की जीविका छीनी जा रही है। अगर इसी तरह राज्य के अन्य जिलों में जलाशयों की खुली डाक से बंदोबस्ती की गई तो प्रदेश का मछुआ समाज बेरोजगारी एवं भुखमरी का शिकार हो जाएगा। आप जानते है कि राज्य का मछुआ समाज आज भी अपनी जीविका के लिए मछली पालन पर निर्भर है। उसमें बड़ी भूमिका सरकार जलाशयों, तालाबों, नदी, आहर, पोखर, जलकर एवं पईनों की है। अगर गरीब मछुआरों से ये भी अधिकार छीन लिया गया, तो यह समुदाय बेमौत मारा जाएगा। अब समय आ गया है कि मछुआ समाज एकजुट होकर अपने हितों की रक्षा के लिए आग आए। जीविका की सुरक्षा किसी भी समाज की सर्वोच्च प्राथमिकता होती है। मछुआरों के लिए जलाशय, तालाब, नदी अगर सुरक्षित रहतें है तो न केवल उनकी जीविका सुरक्षित रहेगी, बल्कि उनके आर्थिक सशक्तिकरण के मार्ग प्रशस्त होगें। वर्तमान परिवेश में मछुआरों को आगे बढने के लिए जलाशयों में अत्याधुनिक तकनीक पर आधारित मत्स्यपालन बहुत जरूरी है। आश्चर्य की बात है एक तरफ सरकार मछुआरों के विकास का दावा कर रही है वहीं दूसरी तरफ उनकी जीविका साधन जलाशय, तालाब, आहर, पोखर नदी, नालों को मछुआरों से छीना जा रहा है। लेकिन अब मछुआ समाज चुप नहीं रहेगा। जल्द ही मछुआ समाज अपने हितों के रक्षा के लिए आगे की रणनीति तैयार करेगा। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए ’’ प्रयाग सहनी, अध्यक्ष, कॉफ्फेड’’ ने मछुआ समितियों एवं उनके सदस्यों की सक्रिय भागीदारी को संगठन की मजबूती के लिए आवश्यक बताया। उन्होंने कहा कि सहकारी संस्था की वास्तविक शक्ति उसके सदस्यों में निहित होती है। पारदर्शिता, अनुशासन, सदस्य सहभागिता और सामूहिक निर्णय के माध्यम से सहकारिता को और मजबूत किया जा सकता है। उन्होंने उपस्थित प्रतिनिधियों से आग्रह किया कि वे अपने क्षेत्रों में समितियों को सक्रिय बनाएं और मत्स्यजीवियों को अधिकाधिक सहकारी व्यवस्था से जोड़ें।
कार्यक्रम में कॉफ्फेड के उत्कृष्ट कार्य करने वाले कर्मचारियों को ’’हरि सहनी के हाथों प्रमाण-पत्र एवं मोमेंटो’’ प्रदान किया गया। उन्होंने नेटस के तहत अप्रेंटिस कर रहे बच्चों को नियुक्ति-पत्र प्रदान किया।
इस अवसर पर भारी संख्या में मछुआ समितियों के अध्यक्ष एवं मंत्री, कॉफ्फेड के निदेशकगण् प्रदीप कुमार सहनी, लालो सहनी, इंदर मुखिया, निरंजन कुमार सिंह, नरेश प्रसाद सहनी, अशोक कुमार चौधरी, पद्मजा प्रियदर्शनी, कुमार शुभम, सानिध्य राज, अभिलाष कुमार, शिवानी देवी, मिनाक्षी कुमारी, राकेश कुमार, मदन कुमार, लाल बाबू सिंह, लाल बाबू सहनी, पदाधिकारीगण् रवि राज, मोनाव्वर अली, प्रमोद कुमार रजक, अमरेन्द्र झा, मोनू कुमार, राहुल कुमार, रानी सहनी, दयानंद कुमार, गोपी कुमार, कंचनवाला, अमृतेश आनंद, सुप्रिया, भारती कुमार, स्वास्तिका राज, चंदन कुमार, रवि सहनी एवं कृष्णा कुमार।