जमुई :विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर देश प्रदेश में ही नहीं, पूरी दुनिया में पर्यावरण प्रदूषण एक गंभीर चुनौती और समस्या बन चुकी है। अनुसूचित जाति महिला कल्याण सेवा समिति संस्था सचिव प्रभाकर कुमार ने कहा कि पर्यावरण और पृथ्वी संरक्षण हमारी जिम्मेदारी है। लेकिन मानव पर्यावरण को खुद प्रदूषित कर रहा है, और उससे स्वयं प्रभावित भी हो रहा है। पर्यावरण प्रदूषण का जिम्मेदार पशु-पक्षी नहीं, बल्कि हम स्वयं मनुष्य ही हैं। पशु- पक्षी तो प्रकृति के चक्र का हिस्सा हैं,वे संतुलन बनाए रखते है, किंतु हम पर्यावरण संतुलन को असंतुलित करते हैं। हम इतना स्वार्थी बन चुके हैं कि हम भावी पीढ़ियों की चिंता नहीं करते। संसाधन का अति दोहन करना मनुष्य की प्रकृति बन चुकी है। पृथ्वी कोई निर्जीव गोला नहीं, बल्कि सांस लेती हुई मां है, जिसकी हर हरियाली उसकी मुस्कान है, हर नदी उसकी धड़कन है और हर वायु उसका प्राण है।अनुसूचित जाति महिला कल्याण सेवा समिति के सदस्य सनोज पंडित ने कहा कि स्वच्छ हवा स्वच्छ संसार, यही है जीवन का आधार। यदि हमने आज प्रकृति को बचा लिया, तो कल प्रकृति हमें बचा लेगी ,नहीं तो विनाश निश्चित है। यदि आज हमने जल, जंगल और जमीन को संजो लिया, तो कल हमारा जीवन सुरक्षित रहेगा। नहीं तो हमारा भविष्य संकटमय होगा ।अगर मनुष्य प्रकृति को अपना मित्र माना तो पृथ्वी स्वर्ग बन जाएगी और अगर शत्रु मान लिया तो विनाश अवश्यंभावी है।यदि मनुष्य पृथ्वी को सम्मान दिया,तो वह हमें जीवन देगी और यदि मानव उसे लुटा तो वह उसे परिणाम दिखाएगी। हम प्रदूषण को रोकने में सफल हो गए,तो आने वाली पीढ़ियों स्वच्छ जीवन पाएंगी अन्यथा वे विषैली हवा में जीने को मजबूर होंगी। कुसुम देवी ने पृथ्वी व प्रकृति को बचाने के लिए सरकार ही नहीं, हर व्यक्ति को वृक्षारोपण करना आवश्यक है।कंचन कुमारी ने कहा कि वृक्षारोपण ही पृथ्वी को बचा सकता है।