बजरंग दल केवल नारे लगाने वाला संगठन नहीं, बल्कि सेवा, सुरक्षा और संस्कार के क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभाने वाला संगठन है :  आनंद

राजगीर में बजरंग दल शौर्य प्रशिक्षण वर्ग का भव्य उद्घाटन, युवाओं में राष्ट्र एवं धर्म रक्षा का संचार

राजगीर  : विश्व हिंदू परिषद दक्षिण बिहार प्रांत के बजरंग दल शौर्य प्रशिक्षण वर्ग का उद्घाटन शनिवार को सरस्वती विद्या मंदिर, हसनपुर (राजगीर) में वैदिक मंत्रोच्चार एवं सामूहिक दीप प्रज्ज्वलन के साथ संपन्न हुआ।उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में विश्व हिंदू परिषद पटना क्षेत्र के क्षेत्र संगठन मंत्री  आनंद   उपस्थित रहे। उनके साथ बजरंग दल दक्षिण बिहार प्रांत के प्रांत संयोजक अधिवक्ता रजनीश  , प्रांत उपाध्यक्ष माननीय परशुराम  , नालंदा जिला अध्यक्ष   देवेंद्र नारायण सिंह   सहित बड़ी संख्या में शिक्षार्थी एवं प्रशिक्षण वर्ग के शिक्षक उपस्थित रहे।कार्यक्रम के प्रारंभ में प्रांत संयोजक अधिवक्ता रजनीश   ने शौर्य प्रशिक्षण वर्ग की भूमिका रखते हुए वर्ग के उद्देश्य एवं महत्व पर प्रकाश डाला। इसके पश्चात क्षेत्र संगठन मंत्री आनंद   ने उपस्थित शिक्षार्थियों का मार्गदर्शन किया।अपने उद्बोधन में आनंद  ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, विश्व हिंदू परिषद तथा उसकी विभिन्न इकाइयों के कार्यों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कहा कि बजरंग दल विश्व हिंदू परिषद की युवा इकाई है, जो राष्ट्र, धर्म और समाज की सेवा के लिए सदैव तत्पर रहती है। उन्होंने कहा कि बजरंग दल केवल नारे लगाने वाला संगठन नहीं, बल्कि सेवा, सुरक्षा और संस्कार के क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभाने वाला संगठन है।उन्होंने कहा कि जब कोई असहाय व्यक्ति अस्पताल में जीवन और मृत्यु के बीच संघर्ष कर रहा होता है, तब बजरंग दल के कार्यकर्ता रक्तदान कर मानवता की सेवा करते हैं और अनेक लोगों का जीवन बचाते हैं। उन्होंने कार्यकर्ताओं से हिंदू समाज के लिए जीने और समाजहित में समर्पित भाव से कार्य करने का आह्वान किया।आनंद जी ने कहा कि यदि देश या समाज पर किसी प्रकार का संकट आता है तो उसके समाधान के लिए बजरंग दल के कार्यकर्ता सबसे आगे खड़े रहते हैं। उन्होंने बताया कि संगठन प्रतिवर्ष हजारों गौवंश की रक्षा करता है तथा धर्मांतरण जैसी चुनौतियों के विरुद्ध समाज को जागरूक करने का कार्य करता है।विश्व हिंदू परिषद की स्थापना एवं उसके उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने बताया कि परिषद का बोध वाक्य “धर्मो रक्षति रक्षितः” है। संगठन का उद्देश्य हिंदू समाज की रक्षा, सामाजिक भेदभाव का उन्मूलन तथा समाज में सांस्कृतिक एवं धार्मिक जागरण लाना है।उन्होंने बताया कि वर्ष 1966 में आयोजित प्रथम विश्व हिंदू सम्मेलन में लगभग 25 हजार प्रतिनिधियों ने भाग लिया था। विश्व हिंदू परिषद के प्रयासों से विभिन्न संत-महात्माओं एवं चारों शंकराचार्यों को एक मंच पर लाकर हिंदू समाज के समक्ष उपस्थित चुनौतियों एवं उनके समाधान पर व्यापक चिंतन किया गया।युवाओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि आज की पीढ़ी को निर्भीक, अनुशासित और राष्ट्रनिष्ठ बनकर देश की सेवा करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि शक्ति केवल साधनों में नहीं, बल्कि उन्हें संचालित करने वाले व्यक्तित्व में निहित होती है।अपने ओजस्वी एवं प्रेरणादायी संबोधन के माध्यम से आनंद जी ने उपस्थित शिक्षार्थियों में शौर्य, सेवा और राष्ट्रभक्ति का भाव जागृत किया। उन्होंने संघ परिवार की विभिन्न इकाइयों एवं उनके कार्यक्षेत्रों की भी जानकारी दी तथा बताया कि समाज के विभिन्न वर्गों के लिए अनेक संगठन कार्यरत हैं, जो राष्ट्र निर्माण के कार्य में अपना योगदान दे रहे हैं। उद्घाटन सत्र के अंत में उपस्थित शिक्षार्थियों ने राष्ट्र, धर्म एवं समाज की सेवा के लिए समर्पित भाव से कार्य करने का संकल्प लिया।

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