बाढ़ : माउंट लिटेरा ज़ी स्कूल, बाढ़ में “ग्लोबल आइकन अवार्ड 2026” समारोह सह शिक्षक संवाद कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र सहित विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में प्राचार्य, शिक्षक-शिक्षिकाएं, शिक्षाविद, सामाजिक कार्यकर्ता एवं गणमान्य अतिथियों ने भाग लिया।कार्यक्रम में शिक्षक सम्मान, शिक्षा सुधार, वित्त रहित शिक्षकों की समस्याएं, वर्तमान शिक्षक राजनीति की कार्यशैली तथा शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही जैसे मुद्दों पर खुलकर चर्चा हुई।कार्यक्रम का शुभारंभ एकेडमी ऑफ ग्लोबल अचीवर्स की चेयरपर्सन एवं पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की एमएलसी प्रत्याशी एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. दिव्य ज्योति, चाणक्य फाउंडेशन ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के संरक्षक डॉ. अशोक गगन एवं अन्य अतिथियों द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया गया।कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉ. दिव्य ज्योति ने कहा कि आज शिक्षक समाज केवल सम्मान की बातें नहीं, बल्कि अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ रहा है। उन्होंने कहा कि जिस शिक्षक के कंधों पर देश और समाज का भविष्य टिका है, वही शिक्षक आज उपेक्षा, असमानता और राजनीतिक छल का शिकार बना हुआ है।उन्होंने कहा कि आज भी हजारों शिक्षक समान कार्य के लिए समान वेतन, सेवा सुरक्षा, पारदर्शी प्रोन्नति व्यवस्था तथा सम्मानजनक कार्य वातावरण के लिए संघर्ष कर रहे हैं।डॉ. दिव्य ज्योति ने वर्तमान शिक्षक नेतृत्व पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि वर्षों तक प्रतिनिधित्व मिलने के बावजूद शिक्षक समाज की समस्याएँ समाप्त नहीं हुईं। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि इतने वर्षों में विद्यालयों और महाविद्यालयों की स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ, तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?उन्होंने कहा कि शिक्षक समाज के बीच यह चर्चा लगातार हो रही है कि वर्तमान एमएलसी ने विद्यालयों एवं महाविद्यालयों के बुनियादी विकास, शिक्षकों की समस्याओं तथा शिक्षा सुधार के मुद्दों को मजबूती से नहीं उठाया।डॉ. दिव्य ज्योति ने आरोप लगाया कि एमएलसी फंड का उपयोग भी पूरी पारदर्शिता और प्रभावशीलता के साथ नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि जहाँ शिक्षा संस्थानों को भवन, पुस्तकालय, डिजिटल संसाधन, प्रयोगशालाओं और आधारभूत सुविधाओं की आवश्यकता थी, वहाँ अपेक्षित स्तर पर विकास कार्य दिखाई नहीं दिए।

उन्होंने कहा कि वर्तमान एमएलसी लगातार यह दावा करते रहे कि स्कूलों और कॉलेजों के आसपास सड़क, गली और नाली जैसी व्यवस्थाएँ उन्हीं के प्रयासों से बनीं तथा शिक्षा क्षेत्र में जो भी विकास हुआ, वह उन्हीं के कारण संभव हुआ।इस पर सवाल उठाते हुए डॉ. दिव्य ज्योति ने कहा कि सड़क, गली और नाली जैसे विकास कार्य राज्य सरकार,सांसद और स्थानीय विधायकों के कार्यक्षेत्र का हिस्सा हैं। ऐसे में शिक्षक समाज यह पूछ रहा है कि क्या अन्य जनप्रतिनिधियों ने कोई काम नहीं किया?उन्होंने कहा कि आज जब शिक्षक समाज जागरूक हो चुका है और बदलाव चाहता है, तब वर्तमान नेतृत्व भयवश विद्यालयों और महाविद्यालयों का दौरा कर रहा है, जबकि पिछले कई दशकों तक शिक्षकों की समस्याओं के समाधान की दिशा में अपेक्षित प्रयास नहीं किए गए। उन्होंने कहा कि आज भी कई विद्यालय और महाविद्यालय संसाधनों के अभाव में संघर्ष कर रहे हैं और शिक्षक सम्मान की बातें केवल मंचों तक सीमित रह गईं।डॉ. दिव्य ज्योति ने कहा कि “अब समय आ गया है कि राजनीति केवल पद बचाने की नहीं, बल्कि शिक्षक समाज का भविष्य बचाने की राजनीति बने। शिक्षक अब भाषण नहीं, बल्कि परिणाम चाहता है।

उन्होंने कहा कि यह चुनाव केवल एक सीट का चुनाव नहीं, बल्कि शिक्षक सम्मान बनाम उपेक्षा, जवाबदेही बनाम मौन राजनीति और नई सोच बनाम पुरानी व्यवस्था की लड़ाई है।कार्यक्रम का सफल संचालन प्रसिद्ध साहित्यकार हेमंत कुमार ने मंच समन्वयक के रूप में किया।कार्यक्रम में दिलीप शर्मा, चंदन सिंह, रवि पासवान, रितेश पाण्डे, कृष्णा पाठक, ई. आशीष सिन्हा, पंकज रजक, मोहम्मद मुदन, अशोक दास सहित सैकड़ों शिक्षक, शिक्षाविद एवं गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।अंत में डॉ. दिव्य ज्योति ने माउंट लिटेरा ज़ी स्कूल, बाढ़ की प्रबंधन समिति के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके सहयोग से यह शिक्षक सम्मान एवं संवाद कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हो सका।कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।