पटना, : बिहार में पुनर्वास और पारामेडिकल विज्ञान में प्रशिक्षण आरम्भ करने वाले, निजी क्षेत्र के सबसे पुराने संस्थान इंडियन इंस्टिच्युट ऑफ हेल्थ एडुकेशन ऐंड रिसर्च में बुधवार को दीक्षांत समारोह का आयोजन किया गया। संस्थान के निदेशक-प्रमुख डा अनिल सुलभ की अध्यक्षता में आयोजित इस समारोह में, पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय से प्राप्त, 72 छात्र-छात्राओं को बैचलर ऑफ मेडिकल लैब टेक्नोलौजी तथा रेडियो इमेजिंग टेक्नोलौजी में स्नातक की उपाधि दी गयी।विद्यार्थियों को उपाधि प्रदान करने के बाद संबोधित करते हुए, पटना उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति राजेंद्र प्रसाद ने कहा कि आधुनिक चिकित्सा पूरी तरह मेडिकल और रेडियो-इमेजिंग जाँच पर आधारित है। इसलिए उपाधि प्राप्त करने वाले प्रशिक्षित व्यक्तियों की भूमिका बहुत महत्त्वपूर्ण है। आप सबसे आशा की जाती है कि जाँच में किसी भी तरह की लापरवाही न हो, क्योंकि आपके एक ग़लत रिपोर्ट पर चिकित्सा ग़लत दिशा में जा सकती है।अपने अध्यक्षीय भाषण में विद्यार्थियों को नसीहत देते हुए डा अनिल सुलभ ने आशा व्यक्त की कि सभी उपाधि-धारी टेक्नोलौजिस्ट निष्ठापूर्वक स्वास्थ्य-सेवाओं में अपना मूल्यवान योगदान देंगे और संस्थान का यश बढ़ाएँगे।अतिथियों का स्वागत संस्थान के प्रबंध निदेशक डा आकाश कुमार ने तथा मंच का संचालन रेडियो-इमेजिंग विभाग के अध्यक्ष डा संतोष कुमार सिंह ने किया। इस अवसर पर मेडिकल लैब के विभागाध्यक्ष प्रो संजीत कुमार, स्पीच थेरापी विभाग की अध्यक्ष डा नेहा कुमारी, ऑफ्थालमोलौजी विभाग के अध्यक्ष प्रो नीतीश भारद्वाज, फ़िज़ियोथेरापी विभाग की अध्यक्ष डा अभिलाषा कुमारी, डा नवनीत कुमार, प्रो चंद्रा आभा, प्रो चंदा कुमारी, डा आदित्य ओझा तथा संस्थान के प्रशासी अधिकारी सूबेदार संजय कुमार समेत बड़ी संख्या में संस्थान के अध्यापक और विद्यार्थी उपस्थित थे।