रांची : गुजरात का मुंद्रा पोर्ट एक बार फिर देश और दुनिया के सामने गंभीर सवालों के केंद्र में है। 25-26 मई 2026 को मुंद्रा के पास लगभग 115 किलो कोकीन, जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत लगभग ₹1150 करोड़ बताई जा रही है, बरामद की गई। यह कोई पहली घटना नहीं है, बल्कि पिछले कई वर्षों से लगातार सामने आ रही घटनाओं की एक और कड़ी है। इससे यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर मुंद्रा पोर्ट व्यापार का केंद्र है या अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स सिंडिकेट का नया सुरक्षित हब बन चुका है?उपरोक्त बातें आज झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमिटी के प्रदेश प्रवक्ता विजय शंकर नायक ने कही। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार “नशा मुक्त भारत” का नारा देती है, लेकिन हकीकत यह है कि देश के सबसे चर्चित निजी बंदरगाहों में से एक मुंद्रा पोर्ट पर बार-बार हजारों करोड़ रुपये की ड्रग्स पकड़ी जा रही है।श्री नायक ने उदाहरण देते हुए कहा कि सितंबर 2021 में मुंद्रा पोर्ट पर लगभग 2988 किलो हेरोइन बरामद हुई थी, जिसकी कीमत हजारों करोड़ रुपये आंकी गई थी और जिसका संबंध अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क तथा आतंकवाद वित्तपोषण से भी जोड़ा गया था। इसके बाद वर्ष 2022 में 75 किलो से अधिक हेरोइन और अन्य मादक पदार्थ जब्त किए गए। वर्ष 2024 में CFS मुंद्रा से 94 लाख से अधिक ट्रामाडोल टैबलेट्स की दो बड़ी खेपें पकड़ी गईं। संसदीय आंकड़ों के अनुसार 2021 से 2025 के बीच गुजरात के बड़े बंदरगाहों से जुड़े ड्रग्स मामलों में सबसे अधिक मामले मुंद्रा पोर्ट से जुड़े पाए गए। उन्होंने कहा कि सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि 2021 में इतनी बड़ी हेरोइन खेप पकड़े जाने के बाद भाजपा सरकार ने दावा किया था कि सुरक्षा व्यवस्था को पूरी तरह मजबूत कर दिया गया है। यदि सुरक्षा इतनी मजबूत थी, तो फिर 2022, 2024 और अब 2026 में हजारों करोड़ रुपये की ड्रग्स आखिर देश में कैसे प्रवेश कर गई? क्या मुंद्रा पोर्ट की सुरक्षा केवल कागजों पर है? या फिर ड्रग्स तस्करों को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है?