पटना, (राकेश कुमार ): कॉफ्फेड एवं आईसीएआर, पटना के मध्य अनुसंधान, प्रशिक्षण एवं मत्स्य विकास हेतु ऐतिहासिक एमओयू संपन्न बिहार राज्य मत्स्यजीवी सहकारी संघ (कॉफ्फेड) एवं आईसीएआर, पटना के मध्य अनुसंधान, नवाचार, तकनीकी सहयोग, प्रशिक्षण एवं मत्स्य तथा मखाना क्षेत्र के समग्र विकास के लिए एक महत्वपूर्ण समझौता पत्र पर हस्ताक्षर किया गया।समझौता पत्र पर आईसीएआर की ओर से निदेशक डॉ. अनूप दास तथा कॉफ्फेड की ओर से प्रबंध निदेशक ऋषिकेश कश्यप ने हस्ताक्षर किए।इस अवसर पर कॉफ्फेड की 298वीं बोर्ड बैठक भी आईसीएआर, पटना परिसर में आयोजित की गई। कार्यक्रम में वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. विवेकानंद भारती, प्रधान वैज्ञानिक डॉ. शंकर दयाल, कॉफ्फेड की निदेशक सुश्री सिमरन, मखाना एक्सपोर्ट मैनेजर रवि राज सहित अनेक वैज्ञानिक, पदाधिकारी एवं बोर्ड सदस्य उपस्थित रहे। बैठक के दौरान ऋषिकेश कश्यप ने निदेशक डॉ. अनूप दास को कॉफ्फेड की ओर से मखाना उपहार भेंट की। मौके पर मखाना एवं उसके विभिन्न उत्पादों की जानकारी प्रदान करने वाली प्रचार सामग्री भी प्रदान किए। इस समझौता पत्र के अंतर्गत एकीकृत मत्स्य पालन, मोती उत्पादन, झींगा पालन, बायोफ्लॉक, अजोला उत्पादन, केकड़ा एवं शंख-घोंघा पालन, सजावटी मत्स्य पालन, बैकयार्ड हैचरी, राज्य मछली मांगुर के संवर्धन, उन्नत मत्स्य प्रजातियों का प्रसार, मखाना-सह-मत्स्य पालन, सिंघाड़ा-सह-मत्स्य पालन, मत्स्य प्रसंस्करण एवं उप-उत्पाद, मछली अपशिष्ट से जैविक खाद निर्माण, जल एवं मृदा परीक्षण, आर्द्रभूमि विकास, केज कल्चर, किसानों एवं मत्स्यजीवियों का प्रशिक्षण, अनुसंधान, तकनीकी हस्तांतरण तथा विभिन्न सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर संयुक्त रूप से कार्य किया जाएगा।समझौता पत्र के अंतर्गत सीआईएफटी, कोच्चि सहित अन्य राष्ट्रीय संस्थानों के सहयोग से मत्स्य प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन एवं कौशल विकास कार्यक्रम भी संचालित किए जाएंगे। साथ ही प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना, प्रधानमंत्री किसान संमृद्वि योजना, मत्स्य आधारभूत संरचना विकास फंड, राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम सहित विभिन्न योजनाओं के माध्यम से मत्स्यजीवियों एवं मत्स्य कृषकों को अधिकाधिक लाभ उपलब्ध कराने हेतु संयुक्त प्रयास किए जाएंगे।कार्यक्रम में आए अतिथियों का स्वागत करते हुए कॉफ्फेड के प्रबंध निदेषक ऋषिकेष कष्यप ने कहा कि कॉफ्फेड राज्य के मछुआरों के हितों के लिए देश की आजादी के बाद से ही निरंतर कार्य कर रहा है। यह संगठन ने प्रदेश के गरीब मछुआरों के जीवन स्तर में सुधार के लिए काफी काम किया है और आज भी उस दिशा में अग्रसर है। कॉफ्फेड मखाना की खेती का बीमा एस. बी. आई. के बीमा कंपनी के साथ किया है। यह देषभर के लिए एक सफल उदाहरण है। कॉफ्फेड को कॉमन सर्विस सेंटर का नोडल एजेंसी बनाया गया है, यह संस्था डिजिटल क्रांति के क्षेत्र में महत्वपूर्ण कदम उठा रही है। अबतक राज्य में 150 से अधिक मछुआ समितियों में कॉमन सर्विस सेंटर खोला जा चुका है।आईसीएआर के निदेशक डॉ. अनूप दास ने कहा कि आईसीएआर एवं कॉफ्फेड के माध्यम से बिहार के मत्स्यजीवियों एवं मत्स्य कृषकों को आधुनिक तकनीक, अनुसंधान, प्रशिक्षण एवं नवाचार का पूर्ण सहयोग प्रदान करेगा, जिससे राज्य में मत्स्य एवं मखाना क्षेत्र का सतत विकास सुनिश्चित हो सके।आपदा प्रबंधन विभाग, बिहार सरकार के उप सचिव पंकज कुमार कमल ने कहा कि मत्स्यजीवी समुदाय राज्य की अर्थव्यवस्था एवं आपदा प्रबंधन व्यवस्था का महत्वपूर्ण अंग है। उन्होंने कहा कि आईसीएआर एवं कॉफ्फेड के बीच हुआ यह समझौता वैज्ञानिक अनुसंधान, आधुनिक तकनीक तथा संस्थागत सहयोग के माध्यम से मत्स्यजीवियों को आपदा के प्रति अधिक सक्षम एवं आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन एवं सरकारी योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन से मत्स्यजीवियों की आजीविका और अधिक सुदृढ़ होगी तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी।बिहार सरकार के कृषि विभाग के संयुक्त सचिव डॉ. राजेन्द्र कुमार ने कहा कि कृषि, मत्स्य एवं मखाना क्षेत्र एक-दूसरे के पूरक हैं और इनके समन्वित विकास से किसानों एवं मत्स्यजीवियों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि की जा सकती है। उन्होंने कहा कि कॉफ्फेड एवं आईसीएआर के बीच हुआ यह समझौता वैज्ञानिक अनुसंधान, नवाचार, प्रशिक्षण, मूल्य संवर्धन तथा आधुनिक तकनीकों को गांव-गांव तक पहुँचाने में मील का पत्थर सिद्ध होगा। उन्होंने आशा व्यक्त की कि इस साझेदारी से एकीकृत मत्स्य पालन, मखाना उत्पादन, प्रसंस्करण, जैविक उत्पाद, निर्यात संवर्धन तथा युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर विकसित होंगे और बिहार कृषि एवं मत्स्य क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान स्थापित करेगा। उन्होंने इस महत्वपूर्ण पहल के लिए आईसीएआर एवं कॉफ्फेड की पूरी टीम को शुभकामनाएं दीं।समारोह के मुख्य अतिथि एवं पूर्व मंत्री हरि सहनी ने कहा कि यह समझौता पत्र बिहार के मत्स्य एवं मखाना क्षेत्र के लिए एक मील का पत्थर सिद्ध होगा। वैज्ञानिक संस्थानों एवं सहकारिता के समन्वय से राज्य के लाखों मत्स्यजीवियों एवं मत्स्य कृषकों की आय में वृद्धि, रोजगार सृजन, मूल्य संवर्धन, निर्यात संवर्धन एवं ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी। इस अवसर पर कहा कि कॉफ्फेड मछुआरो के विकास के लिए निरंतर काम कर रहा है।बोर्ड बैठक की अध्यक्षता कॉॅफेड के अध्यक्ष प्रयाग सहनी ने की। इस बैठक में आई सी ए आर से सीनियर साइंटिस्ट डॉ. विवेकानंद भारती, बिहार कृषि के प्रोजेक्ट निदेशक अनुरोध गिरी एवं ऑपरेशन हेड उदय भानु, कॉफ्फेड के निदेशकगण् शिवनंदन प्रसाद, अरूण सहनी, प्रदीप कुमार सहनी, लालो सहनी, इंदर मुखिया, कपिलदेव सहनी, निरंजन कुमार सिंह, नरेश प्रसाद सहनी, अशोक कुमार चौधरी, सानिध्य राज, अभिलाष कुमार, राकेश कुमार, मदन कुमार, लाल बाबू सिंह, लाल बाबू सहनी एवं सुश्री सिमरन तथा पदाधिकारीगण् रवि राज एवं राहुल कुमार उपस्थित थे।