गया जी :दक्षिण बिहार केन्द्रीय विश्वविद्यालय (सीयूएसबी) के विभिन्न विभागों के कुल नौ (09) छात्र – छात्राओं का भारत सरकार के भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएसएसआर) द्वारा अनुदानित डॉक्टोरल फेलोशिप के लिए चयन हुआ है | शोध के लिए यह प्रतिष्ठित फ़ेलोशिप दो वर्षों की अवधि के लिए दी जायेगी, जिसके तहत चयनित शोधार्थियों को 20 हजार रुपये प्रति माह अनुदान तथा 20 हजार रुपये वार्षिक कंटीजेंसी ग्रांट प्रदान किया जायेगा। इस उपलब्धि पर कुलपति प्रो. कामेश्वर नाथ सिंह, कुलसचिव प्रो नरेंद्र कुमार राणा के साथ विभिन्न विभागों के डीन, विभागाध्यक्षों एवं प्राध्यापकों ने चयनित छात्रों को बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं | कुलपति महोदय ने कहा कि यह उपलब्धि विश्वविद्यालय के लिए गौरव का विषय होने के साथ-साथ विधि एवं सामाजिक विज्ञान के क्षेत्र में शोध के प्रति विश्वविद्यालय की प्रतिबद्धता को भी रेखांकित करती है। जन सम्पर्क पदाधिकारी (पीआरओ) मोहम्मद मुदस्सीर आलम ने बताया कि ऐतिहासिक अध्ययन और पुरातत्त्व विभाग के दो शोधार्थियों नीतेश कुमार और हिमाद्रि बोरा का चयन डॉक्टोरल फेलोशिप के लिए चयन हुआ है। इतिहास विभाग के अध्यक्ष प्रो. सुधांशु कुमार झा के निर्देशन में शोध कर रहे नीतेश के शोध का विषय ‘ए हिस्टॉरिकल स्टडी ऑफ विमेंस हेल्थ इन कोलोनियल बिहार (1912 – 1947) है जबकि डॉ. रोहित कुमार एवं प्रो सुधांशु कुमार झा के संयुक्त निर्देशन में शोध कर रही हिमाद्रि के शोध का विषय ‘कोलोनियल मॉडर्निटी, एथनिसिटी एंड वीमेन : क्लोथिंग एज ए कल्चरल आर्काइव अमंग दी टाई – अहोम कम्युनिटी ऑफ असम (1826-1947)’ है | वहीं स्कूल ऑफ लॉ एंड गवर्नेंस (एसएलजी) के दो शोधार्थियों क्रमशः विनय कुमार सिंह चौहान एवं संतोष कुमार पाणिग्रही को फ़ेलोशिप मिली है | संतोष कुमार पाणिग्रही एसएलजी की सहायक प्राध्यापिका डॉ. चंदना सुबा के मार्गदर्शन में शोध कर रहे हैं। इकनोमिक स्टडीज एंड पॉलिसीज विभाग के शोधार्थियों स्नेहा और राहुल कुमार को भी अपने शोध के लिए यह प्रतिष्ठित अनुदान मिला है | डिपार्टमेंट ऑफ टीचर एजुकेशन के प्राध्यपक प्रो रवि कांत के पर्यवेक्षण में शोध कर रहे शोधार्थी गौतम कुमार का भी चयन आईसीएसएसआर फ़ेलोशिप के लिए हुआ है | आईसीएसएसआर द्वारा प्रदान की जाने वाली यह फेलोशिप सामाजिक विज्ञान के क्षेत्र में उच्च गुणवत्ता वाले शोध को प्रोत्साहित करने तथा युवा शोधकर्ताओं को अपने शोध कार्य को व्यवस्थित एवं प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाने के लिए प्रोत्साहन प्रदान करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।