पटन, (संवाददाता) :बिहार विधान सभा के अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने अपने जम्मू एवं कश्मीर प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से शिष्टाचार भेंट कर विभिन्न समसामयिक विषयों पर विस्तारपूर्वक चर्चा की।मुलाकात के दौरान जम्मू एवं कश्मीर में आधारभूत संरचना के विकास, पर्यटन को बढ़ावा देने, शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क संपर्क, ग्रामीण विकास, जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन तथा रोजगार सृजन सहित विभिन्न विकासात्मक विषयों पर विस्तृत विचार-विमर्श हुआ। दोनों नेताओं ने सुशासन, पारदर्शिता, जनभागीदारी तथा आधुनिक तकनीक के माध्यम से विकास कार्यों को अधिक प्रभावी बनाने के उपायों पर भी अपने विचार साझा किए।अध्यक्ष ने बिहार में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में नवगठित बिहार सरकार के द्वारा किए जा रहे विकास कार्यों एवं ‘विकसित बिहार’ के संकल्प को साकार करने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों के विषय में उन्हें विस्तारपूर्वक बताया । उन्होंने बिहार में आधारभूत संरचना के तीव्र विस्तार, सड़क एवं पुल निर्माण, शिक्षा एवं स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण, कृषि एवं सिंचाई के विकास, उद्योगों को प्रोत्साहन, निवेश आकर्षित करने तथा युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित करने की दिशा में किए जा रहे कार्यों की जानकारी साझा की। अध्यक्ष ने कहा कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में 2047 तक विकसित बिहार बनाने की दिशा में तेजी से कार्य किया जा रहा है। अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने कहा कि भारत के विभिन्न राज्यों के बीच विकास के सफल अनुभवों का आदान-प्रदान देश के समग्र विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है। एक-दूसरे के नवाचारों एवं उत्कृष्ट कार्यप्रणालियों से सीख लेकर राज्यों की विकास यात्रा को और अधिक गति प्रदान की जा सकती है। उन्होंने कहा कि विकसित भारत के लक्ष्य की प्राप्ति में प्रत्येक राज्य की सक्रिय एवं प्रभावी भूमिका है तथा सभी राज्यों के समन्वित प्रयास ही राष्ट्र को नई ऊँचाइयों तक ले जाएंगे।मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी दोनों राज्यों के बीच आपसी सहयोग, अनुभवों के आदान-प्रदान तथा विकास के क्षेत्र में निरंतर संवाद को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि राज्यों के बीच सकारात्मक सहभागिता से जनकल्याणकारी योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन और सुशासन को नई दिशा मिलती है।दोनों नेताओं ने लोकतांत्रिक मूल्यों, सहकारी संघवाद की भावना तथा जनकल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए राज्यों के बीच निरंतर संवाद और सहयोग को और अधिक सुदृढ़ करने पर बल दिया।